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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Mon, 05/09/2022 - 12:20
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal.org
नीति आयोग के सन 2018 के अनुमान के अनुसार 60 करोड़ लोग शुद्ध पेयजल की गंभीर से अतिगंभीर कमी से ग्रसित हैं और हर साल लगभग दो लाख लोगों की अकाल मृत्यु, शुद्ध पानी की अनुपलब्धता के कारण होती है। नीति आयोग के अनुसार सन 2030 तक भारत की पानी की मांग के दो गुना होने का अनुमान है। नीति आयोग के इन अनुमानों और जमीनी हकीकत को ध्यान में रख सरकारों ने शुद्ध पानी पर अनेक योजनाओं पर काम प्रारंभ किया है। इसी कड़ी में पिछले दिनों, प्रधानमंत्री जी ने,

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Submitted by Shivendra on Tue, 05/24/2022 - 13:14
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चरखा फीचर
स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती
शशि ने बहुत दिलचस्प बातें बताई कि उनकी उपज के ग्राहक उसी के आस-पास के ग्रामीण हैं. उन्होंने कहा कि आस-पास गांव के सभी किसान अपनी जमीन पर गेहूं बोते हैं. परंतु वे उनसे गेहूं खरीद के ले जाते हैं कारण यह है कि चूंकि वे अपने खेतों में जहर उगाते हैं, इसलिए शुद्ध खाने के लिए शशि से अनाज खरीदते हैं और अपना रसायन युक्त उपज बाजार में बेच देते हैं. सुधांशु और सुष्मिता की जोड़ी थोड़ी अलग है, वे अपने तथा अन्य लोगों के स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती कर रहे हैं.
Submitted by Editorial Team on Mon, 05/23/2022 - 10:03
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14 May 2022, हस्तक्षेप, सहारा समय
ग्रीन जॉब्स, Source: Wikipedia
इस बार हीटवेव या यूं कहें कि अत्यधिक गर्मी की लहर काफी चर्चा में है। हालांकि भारत में ग्रीष्मकाल गर्म ही होता है‚ और मई में अधिकतम तापमान का 35 डि़ग्री सेल्सियस से अधिक होना असामान्य नहीं है‚ लेकिन पिछले कुछ सालों से बहुत गर्म दिनों की लगातार बिगड़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है। रिपोर्ट बताती हैं कि भारत के लिए सबसे गर्म दिन 1950 के दशक में प्रति वर्ष 40 दिनों से बढ़कर 2020 में 100 दिन हो गए हैं। इस तेज वृद्धि और 35 डिग्री से अधिक के ताप सूचकांक का स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है जो भारत के कई हिस्सों में आम लोग पहले से ही अनुभव कर रहे हैं। लेकिन अधिक चिंता की बात यह है कि कई जलवायु मॉडल ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक कार्बन उत्सर्जन के दोगुना होने के साथ यह परिदृश्य और भी खराब हो जाएगा। ऐसी स्थिति में‚ सदी के अंत तक तापमान में औसतन 4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी‚ जिसका अर्थ है अभूतपूर्व और लंबे समय तक चलने वाली गर्मी‚ अत्यधिक मौसम‚ अस्पताल में भर्ती होने से लेकर मृत्यु तक का खतरा।
Submitted by Editorial Team on Mon, 05/23/2022 - 09:47
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14 May 2022, हस्तक्षेप, सहारा समय
ग्रीन इनर्जी Source: Wikipedia
उत्तरी यूरोप के नॉर्डिक देश (स्वीडन‚ डेनमार्क‚ नॉर्वे‚ फिनलैंड और आइसलैंड) दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हैं। इन देशों की साझा इकोनॉमी 1.6 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुकी है‚ जबकि आबादी सिर्फ 2 करोड़ 70 लाख है। ये देश प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर ही नहीं‚ खुशहाली के इंडेक्स पर भी शीर्ष पर हैं। समावेशी विकास (सस्टेनेबल डवलपमेंट) की इस इबारत के पीछे यहां की ऊर्जा आत्मनिर्भरता अहम कारक है। जनसांख्यिकी और भौगोलिक रूप से नॉर्डिक देशों की भारत से तुलना भले ही उचित न हो लेकिन ऊर्जा आत्मनिर्भरता के स्वप्न को साकार करने में हमें इन छोटे देशों के साथ दीर्घकालिक भागीदारी करनी होगी।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Wed, 06/01/2022 - 14:56
द एवेन्जर्स के सुपरस्टार जेरेमी रेनर
इस क्षेत्र में पानी को लेकर एक बड़ा सर्वे किया था जहां उन्हें यहां के पानी में फ्लोराइड की

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे
Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।
Submitted by Editorial Team on Mon, 03/21/2022 - 11:47
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विश्व जल दिवस पर सेमिनार का आयोजन
आज जल संकट समूचे विश्व की गंभीर समस्या है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया के 37 देश पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। इनमें सिंगापुर, पश्चिमी सहारा, कतर, बहरीन, जमैका, सऊदी अरब और कुवैत समेत 19 देश ऐसे हैं जहां पानी की आपूर्ति मांग से बेहद कम है। दुख की बात यह है कि हमारा देश इन देशों से सिर्फ एक पायदान पीछे है। असलियत यह है कि दुनिया में पांच में से एक व्यक्ति की साफ पानी तक पहुंच ही नहीं है। यह सब सेवा एवं उद्योग क्षेत्र से योगदान बढ़ने के कारण घरेलू और औद्योगिक क्षेत्र में पानी की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी का नतीजा है। यह विचार आज विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में एनवायरमेंट सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन दिल्ली द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी, गाजियाबाद के सभागार में ग्लोबल वाटर कांग्रेस के तकनीकी सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पर्यावरणविद एवं राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री ज्ञानेन्द्र रावत ने व्यक्त किये।

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खासम-खास

आजादी के 75 साल की सौगात: अमृत सरोवर योजना

Submitted by Editorial Team on Mon, 05/09/2022 - 12:20
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
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 कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal.org
नीति आयोग के सन 2018 के अनुमान के अनुसार 60 करोड़ लोग शुद्ध पेयजल की गंभीर से अतिगंभीर कमी से ग्रसित हैं और हर साल लगभग दो लाख लोगों की अकाल मृत्यु, शुद्ध पानी की अनुपलब्धता के कारण होती है। नीति आयोग के अनुसार सन 2030 तक भारत की पानी की मांग के दो गुना होने का अनुमान है। नीति आयोग के इन अनुमानों और जमीनी हकीकत को ध्यान में रख सरकारों ने शुद्ध पानी पर अनेक योजनाओं पर काम प्रारंभ किया है। इसी कड़ी में पिछले दिनों, प्रधानमंत्री जी ने,

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मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़, कर रहे प्राकृतिक खेती

Submitted by Shivendra on Tue, 05/24/2022 - 13:14
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चरखा फीचर
स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती
शशि ने बहुत दिलचस्प बातें बताई कि उनकी उपज के ग्राहक उसी के आस-पास के ग्रामीण हैं. उन्होंने कहा कि आस-पास गांव के सभी किसान अपनी जमीन पर गेहूं बोते हैं. परंतु वे उनसे गेहूं खरीद के ले जाते हैं कारण यह है कि चूंकि वे अपने खेतों में जहर उगाते हैं, इसलिए शुद्ध खाने के लिए शशि से अनाज खरीदते हैं और अपना रसायन युक्त उपज बाजार में बेच देते हैं. सुधांशु और सुष्मिता की जोड़ी थोड़ी अलग है, वे अपने तथा अन्य लोगों के स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती कर रहे हैं.

ग्रीन ऊर्जा में हैं लाखों जॉब्स और सुनहरे मौके

Submitted by Editorial Team on Mon, 05/23/2022 - 10:03
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14 May 2022, हस्तक्षेप, सहारा समय
ग्रीन जॉब्स, Source: Wikipedia
इस बार हीटवेव या यूं कहें कि अत्यधिक गर्मी की लहर काफी चर्चा में है। हालांकि भारत में ग्रीष्मकाल गर्म ही होता है‚ और मई में अधिकतम तापमान का 35 डि़ग्री सेल्सियस से अधिक होना असामान्य नहीं है‚ लेकिन पिछले कुछ सालों से बहुत गर्म दिनों की लगातार बिगड़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है। रिपोर्ट बताती हैं कि भारत के लिए सबसे गर्म दिन 1950 के दशक में प्रति वर्ष 40 दिनों से बढ़कर 2020 में 100 दिन हो गए हैं। इस तेज वृद्धि और 35 डिग्री से अधिक के ताप सूचकांक का स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है जो भारत के कई हिस्सों में आम लोग पहले से ही अनुभव कर रहे हैं। लेकिन अधिक चिंता की बात यह है कि कई जलवायु मॉडल ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक कार्बन उत्सर्जन के दोगुना होने के साथ यह परिदृश्य और भी खराब हो जाएगा। ऐसी स्थिति में‚ सदी के अंत तक तापमान में औसतन 4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी‚ जिसका अर्थ है अभूतपूर्व और लंबे समय तक चलने वाली गर्मी‚ अत्यधिक मौसम‚ अस्पताल में भर्ती होने से लेकर मृत्यु तक का खतरा।

ग्रीन एनर्जी के लिए नॉर्डिक देशों का साथ जरूरी

Submitted by Editorial Team on Mon, 05/23/2022 - 09:47
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14 May 2022, हस्तक्षेप, सहारा समय
ग्रीन इनर्जी Source: Wikipedia
उत्तरी यूरोप के नॉर्डिक देश (स्वीडन‚ डेनमार्क‚ नॉर्वे‚ फिनलैंड और आइसलैंड) दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हैं। इन देशों की साझा इकोनॉमी 1.6 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुकी है‚ जबकि आबादी सिर्फ 2 करोड़ 70 लाख है। ये देश प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर ही नहीं‚ खुशहाली के इंडेक्स पर भी शीर्ष पर हैं। समावेशी विकास (सस्टेनेबल डवलपमेंट) की इस इबारत के पीछे यहां की ऊर्जा आत्मनिर्भरता अहम कारक है। जनसांख्यिकी और भौगोलिक रूप से नॉर्डिक देशों की भारत से तुलना भले ही उचित न हो लेकिन ऊर्जा आत्मनिर्भरता के स्वप्न को साकार करने में हमें इन छोटे देशों के साथ दीर्घकालिक भागीदारी करनी होगी।

प्रयास

भारतीय बच्चों को फ्लोराइड से मुक्ति दिलाएंगे एवेन्जर्स के सुपरस्टार जेरेमी रेनर

Submitted by Shivendra on Wed, 06/01/2022 - 14:56
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द एवेन्जर्स के सुपरस्टार जेरेमी रेनर
इस क्षेत्र में पानी को लेकर एक बड़ा सर्वे किया था जहां उन्हें यहां के पानी में फ्लोराइड की

नोटिस बोर्ड

भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित

Submitted by Shivendra on Fri, 06/10/2022 - 10:20
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भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालो को यूपी सरकार करेगी सम्मानित
भूजल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था या व्यक्ति को उत्तर प्रदेश की सरकार सम्मानित करने जा रही है । उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रथम राज्य भूजल पुरस्कार की घोषणा की है इस पुरस्कार के लिए हर जिले से आवेदन मांगे

स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by Shivendra on Tue, 04/26/2022 - 15:43
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
भारत  और CAWST, कनाडा साथ मिलकर ‘स्वस्थ जीवन के लिए घरेलू जल उपचार और स्वच्छता (WASH) व्यवहार में परिवर्तन’ विषय पर  18 से 20 मई तक गुरुग्राम, हरियाणा  में  तीन-दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहे हैं।

विश्व जल दिवस पर सेमिनार का आयोजन : वक्ताओं ने वर्षा जल संचयन समय की मांग बताया

Submitted by Editorial Team on Mon, 03/21/2022 - 11:47
विश्व जल दिवस पर सेमिनार का आयोजन
आज जल संकट समूचे विश्व की गंभीर समस्या है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया के 37 देश पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। इनमें सिंगापुर, पश्चिमी सहारा, कतर, बहरीन, जमैका, सऊदी अरब और कुवैत समेत 19 देश ऐसे हैं जहां पानी की आपूर्ति मांग से बेहद कम है। दुख की बात यह है कि हमारा देश इन देशों से सिर्फ एक पायदान पीछे है। असलियत यह है कि दुनिया में पांच में से एक व्यक्ति की साफ पानी तक पहुंच ही नहीं है। यह सब सेवा एवं उद्योग क्षेत्र से योगदान बढ़ने के कारण घरेलू और औद्योगिक क्षेत्र में पानी की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी का नतीजा है। यह विचार आज विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में एनवायरमेंट सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन दिल्ली द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी, गाजियाबाद के सभागार में ग्लोबल वाटर कांग्रेस के तकनीकी सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पर्यावरणविद एवं राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री ज्ञानेन्द्र रावत ने व्यक्त किये।

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